रांची CITY

सतत “झारखंड मॉडल” के निर्माण हेतु इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स करेगा झारखंड के 4-पॉइंट कॉल टू एक्शन पर कार्य

रांची में ICC इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी एंड रेजिलिएंस कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन

झारखंड उत्कर्ष संवाददाता
सतत “झारखंड मॉडल” के निर्माण हेतु इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स करेगा झारखंड के 4-पॉइंट कॉल टू एक्शन पर कार्य - header image
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सतत “झारखंड मॉडल” के निर्माण हेतु इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स करेगा झारखंड के 4-पॉइंट कॉल टू एक्शन पर कार्य
रांची: इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा 23 मई 2026 को रांची में ICC इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी एंड रेजिलिएंस कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, पर्यावरण विशेषज्ञों एवं सस्टेनेबिलिटी प्रैक्टिशनर्स ने ESG अपनाने, औद्योगिक लचीलापन तथा झारखंड के सतत विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की।

सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए डॉ. अमृतांशु प्रसाद, चेयरमैन, ICC झारखंड स्टेट काउंसिल ने विभिन्न क्षेत्रों में ESG अपनाने एवं सतत औद्योगिक प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रति ICC की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने सहयोगात्मक एवं परिणामोन्मुखी ढांचे की आवश्यकता पर बल देते हुए ICC झारखंड की ओर से “4-पॉइंट कॉल टू एक्शन” विकसित करने की घोषणा की, जिसमें उद्योग, सरकार, वित्तीय संस्थानों एवं समाज की संयुक्त भागीदारी से सतत विकास एवं जलवायु लचीलापन के लिए एक सशक्त एवं विस्तार योग्य “झारखंड मॉडल” तैयार किया जाएगा।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री अबूबकर सिद्दीकी पी., सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा अध्यक्ष, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झारखंड सरकार ने “सस्टेनेबल इंडस्ट्री एवं प्रदूषण नियंत्रण हेतु ग्रीन फ्यूल सॉल्यूशंस को बढ़ावा” विषय पर मुख्य वक्तव्य दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के सिद्धांतों को उद्योगों एवं संस्थानों की नियमित कार्यप्रणाली एवं संगठनात्मक संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। ICC की इस पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार औद्योगिक सस्टेनेबिलिटी एवं रेजिलिएंस पर इस प्रकार का केंद्रित संवाद आयोजित किया गया है और भविष्य में भी इस तरह के नियमित हितधारक संवाद जारी रहने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज अक्सर पर्यावरण संरक्षण के महत्व को तब समझता है जब परिस्थितियां अपरिवर्तनीय हो जाती हैं। इसलिए उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि पर्यावरणीय क्षति के गंभीर रूप लेने से पहले ही सक्रिय एवं जिम्मेदार कदम उठाए जाएं।
विशेष संबोधन देते हुए श्री रवि रंजन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं अतिरिक्त PCCF, CAMPA, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार ने जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गंभीरता एवं मजबूत पारिस्थितिक संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सतत पारिस्थितिक विकास के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है तथा सस्टेनेबिलिटी से जुड़े नवाचारों को उद्योगों की सक्रिय पहल एवं तकनीकी उन्नति के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।

उद्योग जगत का प्रतिनिधित्व करते हुए श्री राजीव मंगल, वाइस प्रेसिडेंट, Tata Steel ने कंपनी द्वारा दीर्घकालिक ESG एवं डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु अपनाए जा रहे विभिन्न सस्टेनेबिलिटी-आधारित नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने वैकल्पिक ईंधन एवं स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं को अपनाने की दिशा में टाटा स्टील की पहलों को साझा किया।

चर्चा के दौरान श्री संदीप कर, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, Steel Authority of India Limited (SAIL) ने कहा कि देश के स्टील सेक्टर में सबसे बड़े हितधारकों में से एक होने के नाते SAIL अपने RDCIS उपक्रमों के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा उत्पाद की गुणवत्ता एवं परिचालन दक्षता को बढ़ाने हेतु अभिनव स्टील निर्माण प्रक्रियाओं पर कार्य कर रहा है।श्री मयंक शेखर सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, JSW Steel ने भी उभरती हुई ग्रीन स्टील अवधारणा के महत्व पर जोर देते हुए उद्योगों से कम-कार्बन एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रणालियों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का आह्वान किया।

सम्मेलन का समापन इस सामूहिक सहमति के साथ हुआ कि झारखंड एवं देश के लिए एक लचीला, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु उद्योगों, सरकार, वित्तीय संस्थानों, नागरिक समाज एवं पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है।