रांची CITY
रांची में पहली बार आइरिस विश्लेषण तकनीक का आयोजन
बच्चों के मन और व्यवहार को समझने का नया प्रयास
झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में पहली बार आइरिस विश्लेषण तकनीक को लेकर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मानसिक विकास, व्यवहार और उनकी सोच को बेहतर तरीके से समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। यह कार्यक्रम वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन में 26 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित होगा।
आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं और चाहते हैं कि वे उनकी क्षमताओं, रुचियों और व्यवहार को सही तरीके से समझ सकें। इसी दिशा में आइरिस विश्लेषण तकनीक को एक नए और आधुनिक माध्यम के रूप में देखा जा रहा है, जो बच्चों के अंदरूनी गुणों को समझने में सहायक हो सकता है।
इस मौके पर तकनीक की विशेषज्ञ वाणी शुक्ला सिंह ने बताया कि Iris Analysis एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आंखों के रंगीन हिस्से यानी ‘आईरिस’ को स्कैन करके व्यक्ति के व्यवहार, सोच और फोकस से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार, इस विश्लेषण के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है, जो व्यक्ति के वर्तमान स्वभाव और संभावित प्रवृत्तियों के बारे में संकेत देती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तकनीक को पारंपरिक ज्योतिष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मनोविज्ञान और आधुनिक तकनीक का एक संयोजन है। हालांकि, इसे एक सहायक माध्यम के रूप में समझना ज्यादा उपयुक्त है, जो अभिभावकों को बच्चों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के व्यवहार को लेकर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी सोच, रुचि तथा क्षमता भी अलग-अलग होती है। ऐसे में कई बार अभिभावक अपने बच्चों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। इस स्थिति में आइरिस विश्लेषण तकनीक एक मार्गदर्शक के रूप में काम कर सकती है और बच्चों के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल तकनीक को प्रस्तुत करना ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है, ताकि वे बच्चों के विकास को समझते हुए सही दिशा में उनका मार्गदर्शन कर सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया अब तक सकारात्मक रही है और इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
आयोजकों ने झारखंड के लोगों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हों और इस नई तकनीक को करीब से समझें। उनका मानना है कि यह अनुभव अभिभावकों और बच्चों दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं और चाहते हैं कि वे उनकी क्षमताओं, रुचियों और व्यवहार को सही तरीके से समझ सकें। इसी दिशा में आइरिस विश्लेषण तकनीक को एक नए और आधुनिक माध्यम के रूप में देखा जा रहा है, जो बच्चों के अंदरूनी गुणों को समझने में सहायक हो सकता है।
इस मौके पर तकनीक की विशेषज्ञ वाणी शुक्ला सिंह ने बताया कि Iris Analysis एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आंखों के रंगीन हिस्से यानी ‘आईरिस’ को स्कैन करके व्यक्ति के व्यवहार, सोच और फोकस से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार, इस विश्लेषण के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है, जो व्यक्ति के वर्तमान स्वभाव और संभावित प्रवृत्तियों के बारे में संकेत देती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तकनीक को पारंपरिक ज्योतिष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मनोविज्ञान और आधुनिक तकनीक का एक संयोजन है। हालांकि, इसे एक सहायक माध्यम के रूप में समझना ज्यादा उपयुक्त है, जो अभिभावकों को बच्चों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के व्यवहार को लेकर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी सोच, रुचि तथा क्षमता भी अलग-अलग होती है। ऐसे में कई बार अभिभावक अपने बच्चों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। इस स्थिति में आइरिस विश्लेषण तकनीक एक मार्गदर्शक के रूप में काम कर सकती है और बच्चों के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल तकनीक को प्रस्तुत करना ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है, ताकि वे बच्चों के विकास को समझते हुए सही दिशा में उनका मार्गदर्शन कर सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया अब तक सकारात्मक रही है और इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
आयोजकों ने झारखंड के लोगों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हों और इस नई तकनीक को करीब से समझें। उनका मानना है कि यह अनुभव अभिभावकों और बच्चों दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।