राज्य
बूढ़ा पहाड़ के कई गांव में पहली बार बेखौफ दाखिल होगी जनगणना टीम
तीन दशक तक माओवादियों का रहा है ट्रेनिंग सेंटर
झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•

पलामू: पहली बार जनगणना टीम बिना किसी डर के माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर कहे जाने वाले बूढ़ा पहाड़ इलाके में दाखिल होगी. 2011 की जनगणना के दौरान, बूढ़ा पहाड़ से सटे इलाके में कई ऐसे गांव थे जहां टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और वे कई परिवारों तक नहीं पहुंच पाई थी.
2011 के उलट, अब जनगणना टीम को नक्सलियों का खतरा नहीं है. पूरे भारत में जनगणना का काम शुरू हो गया है, और पहले चरण में हाउस लिस्टिंग का कार्य चल रहा है. बूढ़ा पहाड़ से सटे कई गांवों में भी हाउस लिस्टिंग शुरू हो गई है. बूढ़ा पहाड़ के अलावा, पलामू, गढ़वा और लातेहार में कई ऐसे गांव हैं, जहां पहली बार बड़ी संख्या में जनगणना टीमें गांवों में प्रवेश करेंगी.
जनगणना कर्मियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का खास प्लान
पुलिस ने बूढ़ा पहाड़ और दूसरे नक्सली इलाकों में जनगणना के लिए एक खास प्लान तैयार किया है. जनगणना कर्मियों की सुरक्षा पर पिकेट और पुलिस थानों के जरिए नजर रखी जाएगी ताकि उन्हें कोई दिक्कत न हो. पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाके में एक खास प्लान बनाया है. सभी कर्मियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है. बूढ़ा पहाड़ इलाके में एक दर्जन अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बल कैंप हैं, जबकि नक्सल कॉरिडोर में पहले से ही बड़ी संख्या में फोर्स तैनात है.
2024 में बूढ़ा पहाड़ में पहली बार बना था मतगणना केंद्र
2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए बूढ़ा पहाड़ इलाके में पहली बार मतगणना केंद्र बनाया गया था. बूढ़ा पहाड़ के हेसातु में पहली बार मतदान केंद्र बनाया गया. इसी तरह बूढ़ा पहाड़ से सटे तिसिया, नावाटोली समेत कई इलाकों में भी पहली बार मतदान कर्मी पहुंचे.
2011 की जनगणना के दौरान, जनगणना टीम बूढ़ा पहाड़ के झालू डेरा, बहेरा टोली, कुल्हि, हेसातु, तिसिया और नावाटोली जैसे गांवों में कई परिवारों तक नहीं पहुंच पाई थी. 2026 में पहली बार जनगणना टीम सभी परिवारों से डाटा इकट्ठा करेगी.
तीन दशक तक माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर रहा है बूढ़ा पहाड़
बूढ़ा पहाड़ तीन दशकों से माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर रहा है. 2022-23 में, ऑपरेशन ऑक्टोपस द्वारा बूढ़ा पहाड़ को पूरी तरह से नक्सलमुक्त किया गया. 2023 में, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार बूढ़ा पहाड़ का दौरा किया और इसे नक्सल-मुक्त घोषित किया. इसके लिए बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया. इस इलाके में 27 गांव आते हैं, जिनमें गढ़वा के 16 और लातेहार के 11 गांव शामिल हैं. पूरे इलाके की आबादी 20 से 25 हजार है.
2011 के उलट, अब जनगणना टीम को नक्सलियों का खतरा नहीं है. पूरे भारत में जनगणना का काम शुरू हो गया है, और पहले चरण में हाउस लिस्टिंग का कार्य चल रहा है. बूढ़ा पहाड़ से सटे कई गांवों में भी हाउस लिस्टिंग शुरू हो गई है. बूढ़ा पहाड़ के अलावा, पलामू, गढ़वा और लातेहार में कई ऐसे गांव हैं, जहां पहली बार बड़ी संख्या में जनगणना टीमें गांवों में प्रवेश करेंगी.
जनगणना कर्मियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का खास प्लान
पुलिस ने बूढ़ा पहाड़ और दूसरे नक्सली इलाकों में जनगणना के लिए एक खास प्लान तैयार किया है. जनगणना कर्मियों की सुरक्षा पर पिकेट और पुलिस थानों के जरिए नजर रखी जाएगी ताकि उन्हें कोई दिक्कत न हो. पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाके में एक खास प्लान बनाया है. सभी कर्मियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है. बूढ़ा पहाड़ इलाके में एक दर्जन अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बल कैंप हैं, जबकि नक्सल कॉरिडोर में पहले से ही बड़ी संख्या में फोर्स तैनात है.
2024 में बूढ़ा पहाड़ में पहली बार बना था मतगणना केंद्र
2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए बूढ़ा पहाड़ इलाके में पहली बार मतगणना केंद्र बनाया गया था. बूढ़ा पहाड़ के हेसातु में पहली बार मतदान केंद्र बनाया गया. इसी तरह बूढ़ा पहाड़ से सटे तिसिया, नावाटोली समेत कई इलाकों में भी पहली बार मतदान कर्मी पहुंचे.
2011 की जनगणना के दौरान, जनगणना टीम बूढ़ा पहाड़ के झालू डेरा, बहेरा टोली, कुल्हि, हेसातु, तिसिया और नावाटोली जैसे गांवों में कई परिवारों तक नहीं पहुंच पाई थी. 2026 में पहली बार जनगणना टीम सभी परिवारों से डाटा इकट्ठा करेगी.
तीन दशक तक माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर रहा है बूढ़ा पहाड़
बूढ़ा पहाड़ तीन दशकों से माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर रहा है. 2022-23 में, ऑपरेशन ऑक्टोपस द्वारा बूढ़ा पहाड़ को पूरी तरह से नक्सलमुक्त किया गया. 2023 में, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार बूढ़ा पहाड़ का दौरा किया और इसे नक्सल-मुक्त घोषित किया. इसके लिए बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया. इस इलाके में 27 गांव आते हैं, जिनमें गढ़वा के 16 और लातेहार के 11 गांव शामिल हैं. पूरे इलाके की आबादी 20 से 25 हजार है.