धनबाद
पत्रकारों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनमत तैयार किया तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया
पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है : विजय कुमार
झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•

धनबाद। हिंदी पत्रकारिता दिवस पर धनबाद जिले के वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार ने बताया कि हिंदी पत्रकारिता दिवस हमें यह संदेश देता है कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। यह दिवस पत्रकारों के समर्पण, साहस और जिम्मेदारी को सम्मानित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को सत्यनिष्ठ और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए प्रेरित करता है।
1826षा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह समाज को सही दिशा देने, जनसमस्याओं को शासन तक पहुंचाने तथा जनता और सरकार के बीच संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। हिंदी पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक देश और समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक हिंदी समाचार पत्रों और पत्रकारों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनमत तैयार किया तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया। उस समय पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जनचेतना और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम भी बनी। आज डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया ने भी हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। गांवों से लेकर महानगरों तक हिंदी समाचार माध्यमों की पहुंच बढ़ी है, जिससे आम नागरिकों की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्राप्त हो रहा है। हालांकि, बदलते समय में पत्रकारिता के समक्ष फेक न्यूज, पक्षपातपूर्ण खबरें और नैतिक मूल्यों के ह्रास जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में सत्य, निष्पक्षता और जनहित की भावना को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत में प्रतिवर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हिंदी भाषा की पत्रकारिता के इतिहास, उसके संघर्ष, योगदान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन प्रारंभकिया गया था। यही कारण है कि 30 मई हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक दिन माना जाता है।
1826षा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह समाज को सही दिशा देने, जनसमस्याओं को शासन तक पहुंचाने तथा जनता और सरकार के बीच संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। हिंदी पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक देश और समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक हिंदी समाचार पत्रों और पत्रकारों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनमत तैयार किया तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया। उस समय पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जनचेतना और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम भी बनी। आज डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया ने भी हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। गांवों से लेकर महानगरों तक हिंदी समाचार माध्यमों की पहुंच बढ़ी है, जिससे आम नागरिकों की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्राप्त हो रहा है। हालांकि, बदलते समय में पत्रकारिता के समक्ष फेक न्यूज, पक्षपातपूर्ण खबरें और नैतिक मूल्यों के ह्रास जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में सत्य, निष्पक्षता और जनहित की भावना को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत में प्रतिवर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हिंदी भाषा की पत्रकारिता के इतिहास, उसके संघर्ष, योगदान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन प्रारंभकिया गया था। यही कारण है कि 30 मई हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक दिन माना जाता है।