रांची CITY
भारतीय शिक्षण मंडल के झारखंड प्रांत परिचायक वर्ग का भव्य शुभारंभ
भारतीय शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा में भारतीयता पर हुआ मंथन
झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•

रांची।भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत द्वारा आयोजित दो दिवसीय परिचायक वर्ग-2026 का शुभारंभ वाईबीएन विश्वविद्यालय, राजा उलातू, नामकुम, रांची में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शिक्षाविद, शोधार्थी तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
उद्घाटन सत्र में भारतीय शिक्षण मंडल के उद्देश्यों, कार्यपद्धति एवं भारतीय शिक्षा के पुनर्जागरण की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का आरंभ पंजीकरण, भोजन एवं प्रतिभागियों के परिचय के साथ हुआ। इसके उपरांत वर्ग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों का गण विभाजन किया गया तथा आत्मावलोकन एवं दैनिक लेखन की प्रक्रिया के माध्यम से आत्मविकास, आत्मचिंतन एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि पर बल दिया गया।
उद्घाटन बैठक एवं प्रशिक्षण मंडल चर्चा में डॉ. वासुदेव प्रसाद, संस्थापक प्राचार्य, राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर, धनबाद; डॉ. राम जी यादव, प्रति कुलाधिपति, वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची; डॉ. सपना त्रिपाठी, प्राचार्य, शहीद शेख भिखारी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रांची; डॉ. सुभाष साहू, प्रदेश मंत्री, भारतीय शिक्षण मंडल; डॉ. ओम प्रकाश सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय शिक्षण मंडल; डॉ. सुबोध, डॉ. सीमा प्रसाद, डॉ. अनुपमा सिंह, डॉ. अंजना सिंह, शोधार्थी निरंजन मंडल, गुरप्रीत, डॉ. अरविंद कुमार लाल, डॉ. ओम प्रकाश (गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रांची) सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्राध्यापक एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ प्रातः जागरण, एकात्मता स्तोत्र एवं योग साधना से हुआ। प्रथम शैक्षणिक सत्र में डॉ. सत्येंद्र पोद्दार, कुलपति, वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची ने "भारतीय शिक्षा दर्शन और शिक्षा में भारतीयता" विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण की चेतना का विकास करना है।
दूसरे सत्र में डॉ. ओम प्रकाश सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय शिक्षण मंडल ने "कार्य, कार्यक्रम, गतिविधि एवं कार्यविभाग" विषय पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने संगठनात्मक कार्यों की संरचना, शिक्षा जगत में भारतीय शिक्षण मंडल की भूमिका तथा शिक्षकों की सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला।
वर्ग में आयोजित अभ्यास कार्यशाला में ध्येय श्लोक, ध्येय वाक्य एवं संगठन गीत का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात आयोजित तृतीय सत्र में संगठन मंत्री श्री प्रियजीत भट्टाचार्या ने कार्यकर्ता विकास, मंडल की कार्यपद्धति, अध्ययन समूह एवं संगठन विस्तार के विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
चतुर्थ सत्र में डॉ. रंजीत कुमार मिश्र, प्राचार्य, कार्तिक उरांव महाविद्यालय, रातू, रांची ने "प्रत्यक्ष मंडल" विषय पर मार्गदर्शन दिया। वहीं अंतिम सत्र में मुक्त चर्चा, जिज्ञासा समाधान, अनुभव कथन एवं समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और भारतीय शिक्षा के संवर्धन हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य शिक्षा को भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ते हुए ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है, जो विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रभक्ति का विकास करे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा आधारित शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा भारतीय दृष्टि पर आधारित शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। परिचायक वर्ग में झारखंड के सभी जिलों से आए शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की सहभागिता उल्लेखनीय रही।
यह दो दिवसीय परिचायक वर्ग भारतीय शिक्षण मंडल के उद्देश्यों, कार्यों एवं भारतीय शिक्षा की मूल अवधारणाओं को समझने और उन्हें समाज तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।
उद्घाटन सत्र में भारतीय शिक्षण मंडल के उद्देश्यों, कार्यपद्धति एवं भारतीय शिक्षा के पुनर्जागरण की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का आरंभ पंजीकरण, भोजन एवं प्रतिभागियों के परिचय के साथ हुआ। इसके उपरांत वर्ग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों का गण विभाजन किया गया तथा आत्मावलोकन एवं दैनिक लेखन की प्रक्रिया के माध्यम से आत्मविकास, आत्मचिंतन एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि पर बल दिया गया।
उद्घाटन बैठक एवं प्रशिक्षण मंडल चर्चा में डॉ. वासुदेव प्रसाद, संस्थापक प्राचार्य, राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर, धनबाद; डॉ. राम जी यादव, प्रति कुलाधिपति, वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची; डॉ. सपना त्रिपाठी, प्राचार्य, शहीद शेख भिखारी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रांची; डॉ. सुभाष साहू, प्रदेश मंत्री, भारतीय शिक्षण मंडल; डॉ. ओम प्रकाश सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय शिक्षण मंडल; डॉ. सुबोध, डॉ. सीमा प्रसाद, डॉ. अनुपमा सिंह, डॉ. अंजना सिंह, शोधार्थी निरंजन मंडल, गुरप्रीत, डॉ. अरविंद कुमार लाल, डॉ. ओम प्रकाश (गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रांची) सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्राध्यापक एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ प्रातः जागरण, एकात्मता स्तोत्र एवं योग साधना से हुआ। प्रथम शैक्षणिक सत्र में डॉ. सत्येंद्र पोद्दार, कुलपति, वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची ने "भारतीय शिक्षा दर्शन और शिक्षा में भारतीयता" विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण की चेतना का विकास करना है।
दूसरे सत्र में डॉ. ओम प्रकाश सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय शिक्षण मंडल ने "कार्य, कार्यक्रम, गतिविधि एवं कार्यविभाग" विषय पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने संगठनात्मक कार्यों की संरचना, शिक्षा जगत में भारतीय शिक्षण मंडल की भूमिका तथा शिक्षकों की सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला।
वर्ग में आयोजित अभ्यास कार्यशाला में ध्येय श्लोक, ध्येय वाक्य एवं संगठन गीत का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात आयोजित तृतीय सत्र में संगठन मंत्री श्री प्रियजीत भट्टाचार्या ने कार्यकर्ता विकास, मंडल की कार्यपद्धति, अध्ययन समूह एवं संगठन विस्तार के विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
चतुर्थ सत्र में डॉ. रंजीत कुमार मिश्र, प्राचार्य, कार्तिक उरांव महाविद्यालय, रातू, रांची ने "प्रत्यक्ष मंडल" विषय पर मार्गदर्शन दिया। वहीं अंतिम सत्र में मुक्त चर्चा, जिज्ञासा समाधान, अनुभव कथन एवं समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और भारतीय शिक्षा के संवर्धन हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य शिक्षा को भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ते हुए ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है, जो विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रभक्ति का विकास करे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा आधारित शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा भारतीय दृष्टि पर आधारित शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। परिचायक वर्ग में झारखंड के सभी जिलों से आए शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की सहभागिता उल्लेखनीय रही।
यह दो दिवसीय परिचायक वर्ग भारतीय शिक्षण मंडल के उद्देश्यों, कार्यों एवं भारतीय शिक्षा की मूल अवधारणाओं को समझने और उन्हें समाज तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।