राज्य
राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन
बाबा साहेब का जीवन युवाओं के लिए संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान की प्रेरणा है :रामदास अठावले
झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•


शिक्षा केवल सफलता का मार्ग नहीं बल्कि आत्मसम्मान,सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है: कुलाधिपति
रामगढ़।राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में "आर्थिक असमानता एवं बेरोजगारी के संदर्भ में डॉ. भीमराव अंबेडकर का समग्र दृष्टिकोण" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए।
''मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की बढ़ाई शोभा''
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले जी, विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति श्री रंगनाथ पांडेय, गोमती नगर, लखनऊ के रूप में उपस्थित रहे। वहीं महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) के कुलपति डॉ. आर. सी. मिश्रा और नेशनल वॉयस प्रेसीडेंस महिला अघाड़ी डॉ माई देशमुख उपस्थित रहे।राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी. एन. साह ने की। विश्वविद्यालय प्रबंधन की सराहनीय पहल विश्वविद्यालय कुलाधिपति धर्मपत्नी फूलमती देवी, सचिव प्रियंका कुमारी, कुलपति प्रो (डॉ.) रश्मि,कुलसचिव प्रो (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो (डॉ) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, राधा गोविन्द स्कूल प्राचार्य डॉ सुमित मोहंती , इंटर कॉलेज प्राचार्य सोमा पाण्डेय , समाजसेवी सी पी सनतन, मीडिया प्रभारी डॉ संजय सिंह एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ। अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय कुलगीत एवं मधुर गीत-संगीत, नृत्य के साथ किया गया, जिसने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय कुलपति ने अपने स्वागत भाषण में सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठियां ज्ञान नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है।रामदास अठावले ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर का सपना केवल सामाजिक समानता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आर्थिक न्याय, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के माध्यम से एक सशक्त भारत का निर्माण करना चाहते थे। युवाओं को उनके विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।रंगनाथ पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर गंभीर चिंतन का महत्वपूर्ण अवसर है।आर सी मिश्रा ने कहा डॉ. भीमराव अंबेडकर के आर्थिक चिंतन, सामाजिक न्याय, समान अवसर, रोजगार सृजन तथा समावेशी विकास के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला।कुलाधिपति बी. एन. साह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार सामाजिक समरसता, आर्थिक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से उनके विचारों को आत्मसात कर समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।सभी अतिथियों द्वारा संगोष्ठी की स्मारिका का लोकार्पण (विमोचन) किया गया।तकनीकी सत्र में सभी शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जिन पर विषय विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा करते हुए उपयोगी सुझाव प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ रंजना पाण्डेय, डॉ अमरेश पांडेय और डॉ पूनम कुमारी ने किया। धन्यवाद एवं आभार प्रकट विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो (डॉ) निर्मल कुमार मंडल ने दिया । अंत में सभी उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया,जिसके साथ कार्यक्रम का सफल समापन किया गया।
''मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की बढ़ाई शोभा''
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले जी, विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति श्री रंगनाथ पांडेय, गोमती नगर, लखनऊ के रूप में उपस्थित रहे। वहीं महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) के कुलपति डॉ. आर. सी. मिश्रा और नेशनल वॉयस प्रेसीडेंस महिला अघाड़ी डॉ माई देशमुख उपस्थित रहे।राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी. एन. साह ने की। विश्वविद्यालय प्रबंधन की सराहनीय पहल विश्वविद्यालय कुलाधिपति धर्मपत्नी फूलमती देवी, सचिव प्रियंका कुमारी, कुलपति प्रो (डॉ.) रश्मि,कुलसचिव प्रो (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो (डॉ) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, राधा गोविन्द स्कूल प्राचार्य डॉ सुमित मोहंती , इंटर कॉलेज प्राचार्य सोमा पाण्डेय , समाजसेवी सी पी सनतन, मीडिया प्रभारी डॉ संजय सिंह एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ। अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय कुलगीत एवं मधुर गीत-संगीत, नृत्य के साथ किया गया, जिसने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय कुलपति ने अपने स्वागत भाषण में सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठियां ज्ञान नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है।रामदास अठावले ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर का सपना केवल सामाजिक समानता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आर्थिक न्याय, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के माध्यम से एक सशक्त भारत का निर्माण करना चाहते थे। युवाओं को उनके विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।रंगनाथ पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर गंभीर चिंतन का महत्वपूर्ण अवसर है।आर सी मिश्रा ने कहा डॉ. भीमराव अंबेडकर के आर्थिक चिंतन, सामाजिक न्याय, समान अवसर, रोजगार सृजन तथा समावेशी विकास के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला।कुलाधिपति बी. एन. साह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार सामाजिक समरसता, आर्थिक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से उनके विचारों को आत्मसात कर समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।सभी अतिथियों द्वारा संगोष्ठी की स्मारिका का लोकार्पण (विमोचन) किया गया।तकनीकी सत्र में सभी शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जिन पर विषय विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा करते हुए उपयोगी सुझाव प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ रंजना पाण्डेय, डॉ अमरेश पांडेय और डॉ पूनम कुमारी ने किया। धन्यवाद एवं आभार प्रकट विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो (डॉ) निर्मल कुमार मंडल ने दिया । अंत में सभी उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया,जिसके साथ कार्यक्रम का सफल समापन किया गया।