रांची CITY
YBN यूनिवर्सिटी में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर विशेष कार्यक्रम
विद्यार्थियों ने दिया स्वस्थ जीवनशैली का संदेश
झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•

रांची। YBN यूनिवर्सिटी, रांची में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और फिजियोथेरेपी से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य, नियमित व्यायाम एवं सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूक किया। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 का वैश्विक थीम *“हृदय संबंधी रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिका”* है। इस वर्ष का अभियान फिजियोथेरेपी और नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से हृदय संबंधी रोगों एवं स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन तथा पुनर्वास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने फिजियोथेरेपी के महत्व, नियमित व्यायाम, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली के लाभों के बारे में लोगों को जानकारी दी। विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों एवं जागरूकता संदेशों के माध्यम से बताया कि नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है, बल्कि हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने तथा इनके बाद बेहतर पुनर्वास में भी फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में *NCAHP के सदस्य डॉ. अभय पांडेय, **विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग के HOD एवं झारखंड फिजियोथेरेपी काउंसिल के सदस्य डॉ. राहुल कुमार, रिम्स सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. देवेंद्र मुंडा एवं डॉ. स्मृति* डॉ. राहुल सिंह, डॉ. नरमयदा पांडेय, डॉ. गोपाल पांडेय, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. राजू कुमार यादव,**डॉ. विभोर कुमार सिंह,सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
अतिथियों ने फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में विद्यार्थियों की भूमिका और समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में बदलती जीवनशैली के कारण लोगों में शारीरिक निष्क्रियता बढ़ रही है, ऐसे में नियमित व्यायाम, शारीरिक गतिविधि और आवश्यकता के अनुसार फिजियोथेरेपी को जीवन का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में फिजियोथेरेपी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावशाली बनाया।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि *नियमित शारीरिक गतिविधि, उचित व्यायाम और आवश्यकता के अनुसार फिजियोथेरेपी स्वस्थ एवं बेहतर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।* साथ ही, हृदय संबंधी रोगों और स्ट्रोक की रोकथाम एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका के प्रति समाज को जागरूक करना भी समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने फिजियोथेरेपी के महत्व, नियमित व्यायाम, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली के लाभों के बारे में लोगों को जानकारी दी। विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों एवं जागरूकता संदेशों के माध्यम से बताया कि नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है, बल्कि हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने तथा इनके बाद बेहतर पुनर्वास में भी फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में *NCAHP के सदस्य डॉ. अभय पांडेय, **विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग के HOD एवं झारखंड फिजियोथेरेपी काउंसिल के सदस्य डॉ. राहुल कुमार, रिम्स सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. देवेंद्र मुंडा एवं डॉ. स्मृति* डॉ. राहुल सिंह, डॉ. नरमयदा पांडेय, डॉ. गोपाल पांडेय, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. राजू कुमार यादव,**डॉ. विभोर कुमार सिंह,सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
अतिथियों ने फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में विद्यार्थियों की भूमिका और समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में बदलती जीवनशैली के कारण लोगों में शारीरिक निष्क्रियता बढ़ रही है, ऐसे में नियमित व्यायाम, शारीरिक गतिविधि और आवश्यकता के अनुसार फिजियोथेरेपी को जीवन का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में फिजियोथेरेपी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावशाली बनाया।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि *नियमित शारीरिक गतिविधि, उचित व्यायाम और आवश्यकता के अनुसार फिजियोथेरेपी स्वस्थ एवं बेहतर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।* साथ ही, हृदय संबंधी रोगों और स्ट्रोक की रोकथाम एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका के प्रति समाज को जागरूक करना भी समय की आवश्यकता है।